Sarvam AI के विवेक राघवन: भारत 'डिजिटल कॉलोनी' बन सकता है, ट्रिलियन-पैरामीटर मॉडल 6-9 महीने में

भारतीय AI स्टार्टअप Sarvam AI के सह-संस्थापक विवेक राघवन ने कहा है कि अगर भारत अपनी खुद की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षमताएं नहीं विकसित करता और विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहता है, तो देश "डिजिटल कॉलोनी" बनने का जोखिम है। उन्होंने यह बात Financial Times के साथ इंटरव्यू में कही, जिसकी रिपोर्ट Hindustan Times और अन्य भारतीय मीडिया ने 31 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित की।
ट्रिलियन-पैरामीटर मॉडल की योजना
राघवन ने बताया कि Sarvam AI ट्रिलियन-पैरामीटर वाला मॉडल डेवलप कर रहा है, जो छह से नौ महीने में तैयार होने की उम्मीद है। कंपनी ने पहले ही सरकारी कंप्यूटिंग संसाधनों का उपयोग करके 105-बिलियन-पैरामीटर मॉडल बनाया है। इसके वॉइस एजेंट रोजाना लगभग 2.5 से 3 मिलियन कॉल्स हैंडल करते हैं और 12 भारतीय भाषाओं का समर्थन करते हैं, कुछ मॉडल 22 भाषाओं तक कवर करते हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि वैश्विक टेक दिग्गज मुफ्त में एडवांस्ड AI सर्विसेज ऑफर कर रहे हैं, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा मुश्किल हो सकती है। "अगर कोई अन्य उद्योग में 100 बिलियन डॉलर निवेश करके दूसरे देश में मुफ्त दे दे, तो उसे डंपिंग कहा जाएगा। AI में यही हो रहा है," उन्होंने कहा।
सॉवरेन AI की जरूरत
राघवन का मानना है कि भारत को अपने AI मॉडल, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा कंट्रोल पर ध्यान देना चाहिए। कंपनी की स्थापना राघवन और प्रत्युष कुमार ने की थी, और यह भारतीय भाषाओं के लिए टेलर्ड फाउंडेशनल मॉडल और वॉइस टेक्नोलॉजी पर फोकस करती है। जून में कंपनी ने Series B फंडिंग में 234 मिलियन डॉलर जुटाए थे, जिसमें HCLTech लीड इन्वेस्टर था।
उन्होंने आशा जताई कि भविष्य में "सौ Sarvam" होंगे और भारत बदलाव के अग्रणी में रहेगा। यह इंटरव्यू भारत की AI सॉवरेनिटी पर जारी बहस का हिस्सा है, जहां सरकार IndiaAI Mission के तहत घरेलू मॉडल को सपोर्ट कर रही है।





